Tuesday, 29 September 2015

ह्रदय विराजें सदा ही जिनके, राम लखन औ जानकी आवो हम सब मिलकर करलें, आरति उन हनुमान की

ह्रदय विराजें सदा ही जिनके, राम लखन औ जानकी
आवो हम सब मिलकर करलें, आरति उन हनुमान की

शंकर सुवन, केसरी नन्दन, अंजनी माँ के दुलारे है
प्रभु चरनन में आस लगी है दास ये सबके प्यारे है
निगल गये थे सूर्य को एक दिन, सब देवों से न्यारे है
भक्त्ति पसारे, राम दुवारे, वहाँ के ये रखवारे हैं
मुख से जिनके हरदम निकले, जै हो कृपा निधान की

नाधि गये सतयो जन सागर, कपिदल तब हर्षाया था
अजर, अमर, गुण निधि सुत का आशीष सिया से पाया था
मेघनाद सा अतुलित योद्धा, आपसे ही घबराया था
हार गया जब लड़ते-२ तब ब्रह्मास्त्र चलाया था
बंध कर गये दे खने महिमा, रावण के अभिमान की

जला के लंका, वीर है वंका, रावण गर्व मिटाया था
सीता माँ का पता बताकर, प्रभु को सुख पहुंचाया था
लखनलाल की जान बचाकर, तिहुँपुर नाम कमाया था
फाड़ के सीना दिखा दिये जो प्रभु को ह्रदय बसाया था
गुरुदेव हर जगह सत्य से विजय हुई भगवान की

No comments:

Post a Comment