Wednesday, 3 April 2013

कर शेर सवारी आओ माँ भक्तों को दर्श दिखाओ माँ

कर शेर सवारी आओ माँ
भक्तों को दर्श दिखाओ माँ
होठों पे फरियाद लिये है
कब से खड़े सवाली
महर करो माँ
अब तो भर दो झोली खाली...

ऊँचे पर्वत टेड़े रास्ते
चढ़ के कठिन चढ़ाई
फूले पाँव के छाले
आके तेरे द्वार महामांई
मुखडे लाल गुलाब
हो चढ़ गई तेरे नाम की लाली
महर करो माँ
अब तो भर दो झोली खाली...

कोई तो माँफी माँग रहा
कोई मन्नत माँगने आया
भेज के चिट्ठियाँ सबको
तुमने माँ दरबार बुलाया
सबकी किस्मत की चाबी
तेरे हाथों में शेरा वाली
महर करो माँ
अब तो भर दो झोली खाली...

मतलब की इस दुनिया में
स्वार्थ का डंका बाजे
बेबस लाचारों की खातिर
खुले तेरे दरवाजे
काटो इन भक्तों की मईया
अब तो तुम कंगाली
महर करो माँ
अब तो भर दो झोली खाली...

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