Monday, 1 April 2013

शुभ का संकेत जग में साश्वत एक ही मेरे साई राम

साई राम साई श्याम साई राम साई श्याम साई राम,
भज ले मन में साई परम मंगल साई ,
शुभ का संकेत जग में साश्वत एक ही मेरे साई राम
साई राम साई श्याम....

युगों युगों के बाद कलयुग में तेरा अवतार यह ,
स्वामी दत्तात्रेय दिगंबर साई साक्षातकार यह
जग में हर जाती धरम का तुझ को ही करता परनाम
शुभ का संकेत जग में साश्वत एक ही मेरे साई राम ...
साई राम साई श्याम ॥

तेरे आगे बूँद है हम तू तो ज्ञान का सागर
हम है मिटटी और कंकर मोतियों की तू गागर
सारे जग में मेरे साई जैसा न कोई समान
शुभ का संकेत जग में...

साई सांसों की है धड़कन साई ही बस मेरे तन मन
साई धन दौलत इमां साई को जीवन है अर्पण
साई दे सुख शान्ति मन को साई दे आराम
शुभ का संकेत जग में साश्वत...

तू ही ब्रह्मा तू ही विष्णु तू ही शिव मलहारी
तू ही चालक तू ही पालक तू ही तो संधारी
अखिल श्रृष्टि के चराचर में बसे मेरे साई श्याम
शुभ का संकेत जग में साश्वत...

दे हमें कुछ ऐसी दृष्टि जिससे हम तुझे देख ले
तेरे आशिर वचन से हम ज्ञान थोड़ा बाँट ले
आयें है इस जग में तो कुछ पुण्य का करते है
शुभ का संकेत जग में साश्वत...

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