Tuesday, 23 April 2013

राम कृपा से दुनिया चले कोई माने न माने भले ।।

राम कृपा से दुनिया चले कोई माने न माने भले ।।
जो भी मिलता जिसे, राम देते उसे
रोजी-रोटी के सिलसिले । कोई माने न माने भले ।।
जो भी होता सही, राम करते वही
उनके मर्जी बिना एक पत्ता भी न हिले । कोई माने न माने भले ।।
अग-जग में बसे, कण-कण में रमें
सूरज चंदा में भी ज्योति उनकी जले । कोई माने न माने भले ।।
सुर, नर, मुनि ध्यायें, गुन उनके ही गायें
जग में दूजा नहीं राम सम कोउ मिले । कोई माने न माने भले ।।
प्रभु की माया निराली, जाल ऐसा वो डाली
जग भूला फिरे, घूमें-झूमें बनाता किले । कोई माने न माने भले ।।
जो भी प्रभुको न भूला, मन जिसका न फूला
जग में जीता वही, धन भाग उसके खिले । कोई माने न माने भले ।।
संतोष ध्याये उन्हें, जो बुलाए उन्हें
प्रेम से आके उसको लगा लें गले । कोई माने न माने भले ।।

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