Thursday, 7 March 2013

जबसे बढ़ा सांई से रिश्ता दुनियां छूटी जाय

जबसे बढ़ा सांई से रिश्ता दुनियां छूटी जाय
हम आऐ सांई के द्वारे धरती कहीं भी जाय
 
चहूं ओर तूफ़ान के धारे, मैली हवा वीरान किनारे 
जीवन नैया सांई सहारे फिर भी चलती जाय
जबसे बढ़ा सांई से रिश्ता दुनिया छूटी जाय
 
नाम सिमरले जब तक दम है, बोझ ज़ियादा वक्त भी कम है 
याद रहे दो दिन की उमरिया पल पल घटती जाय
जबसे बढ़ा………………
 
सांई के मंदिर में आए जब श्रद्दा के हार चढ़ाए
मन विश्वास के फूल की रंगत और निखरती जाय
जबसे बढ़ा……………
 
भक्तों को दर्शन भिक्षा दो, रक्षा की ठंडक पहुंचा दो
तुम ही कहो ये बिरहा कि अग्नि कब तक जलती जाय
 
जबसे बढ़ा सांई से रिश्ता दुनिया छूटी जाय 
हम आए सांई के द्बारे धरती कहीं भी जाय

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