Thursday, 7 March 2013

हे! गजवदन विनायक वन्दन

हे! गजवदन विनायक वन्दन,
अर्पित अक्षत कुंकुम चन्दन.
विद्या-वारिधि, बुद्धि-विधाता-
कंटक कष्ट विपद भय त्राता.
 
मनुज-दनुज-सुर पूजें निश-दिन-
हे जनगण के भाग्य-विधाता.
पल में रचते मरू में मधुवन,
हे! गजवदन विनायक वन्दन. 

मोदक-प्रेमी, अक्षर-नायक,
क्षिप्र-सुलिपिविद, भाग्याविधायक.
विपुल-कलाविद, मंगलकर्ता-
वादक, नर्तक, लेखक, गायक.
 
हास लुटाते, हारकर कृन्दन.
हे! गजवदन विनायक वन्दन.
पर्यावरण-प्रकृति के सर्जक,
सुख-समृद्धि, यश-शांति सुवर्धक.
 
प्रतिभा-मेधा के उन्नायक-
वर दो प्रभु हम हों यश-अर्जक.
तोड़ो प्रभु! आरक्षण-बंधन.
हे! गजवदन विनायक वन्दन.

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