Saturday, 23 March 2013

सारे आलम में बढ़कर है, माँ शेरावाली का दरबार |

सारे आलम में बढ़कर है, माँ शेरावाली का दरबार |
एक बार जो पहुँच गया, वो आना चाहे बारम्बार ||

यहाँ ठिकाना मिलता है, हर एक आने वाले को |
मैया भी देती हैं आदर, हर एक बुलाने वाले को ||

इसीलिए सारे ब्रह्माण्ड में, होता है माँ का जयकार |
सारे आलम में बढ़कर है, माँ शेरावाली का दरबार ||

नजरो के एक इशारे से, यहाँ झोली भर दी जाती है |
नहीं जरूरत है कहने की, सूरत ही पढ़ ली जाती है ||

किसी को मिले संतान, किसी को दौलत का अम्बार |
सारे आलम में बढ़कर है, माँ शेरावाली का दरबार ||

‘श्याम’ बना यहाँ बंसीवाला , राम भी बना धनुधारी |
विष्णु को मिला चक्र सुदर्शन , भोले बन गए भंडारी ||

मंगता नहीं बना इस दर कोई , माँ ऐसा तेरा प्यार |
सारे आलम में बढ़कर है , माँ शेरावाली का दरबार ||

No comments:

Post a Comment