Friday, 3 February 2012

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में




अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में - २ 

मेरा निश्चय बस एक यही, इक बार तुम्हे मैं पा जाऊं
इक बार तुम्हे मैं पा जाऊं 
मेरा निश्चय बस एक यही, इक बार तुम्हे मैं पा जाऊं 
अर्पण कर दूँ दुनिया भर का, सब प्यार तुम्हारे हाथों में.

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में. 

जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, जो जल में कमल का फूल रहे 
जो जल में कमल का फूल रहे 
जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, जो जल में कमल का फूल रहे
मेरे गुण दोष समर्पित हो, भगवान् तुम्हारे हाथों में.

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में. 

यदि मानुष का मुझे जन्म मिले, तब चरणों का मैं पुजारी बनूँ 
तब चरणों का मैं पुजारी बनूँ 
यदि मानुष का मुझे जन्म मिले, तब चरणों का मैं पुजारी बनूँ 
इस पूजक की इक - इक नस का, सब तार तुम्हारे हाथों में

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में. 

जब - जब संसार का कैदी बनूँ , निष्काम भाव से कर्म करूँ
निष्काम भाव से कर्म करूँ
फिर अंत समाये में प्राण तजूं, निराकार तुम्हारे हाथों में.

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में. 

मुझमे तुझमे बस भेद यही, मैं नर हूँ आप नारायण हो
मैं नर हूँ आप नारायण हो 
मैं हूँ संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में.

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में - २ 

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