Friday, 3 February 2012

हर बात भुला दो जीवन में यह बात भुलाओ न जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न


हर बात भुला दो जीवन में यह बात भुलाओ न
यह बात भुलाओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न
हर बात भुला दो जीवन में यह बात भुलाओ न
यह बात भुलाओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न

है माँ ममता की खान
कहते है वेद पुराण - २

पाने के लिए तुमको कितनी चौखट पे सदा दी है
जप तप व्रत और मन्नत मांगी, कितनी पूजा की है
जब गर्भ में माँ के तू आया
हर सुख को त्याग दिया
तकलीफ़ तुम्हे न हो कोई बस यह प्रयास किया.

भारी कष्टों को सह कर तुमको दुनिया में लाई
तेरे रोने पे माँ रोई
हँसने पर मुस्कुराई
खुद को कर घीले में, सूखे में तुम्हे सुलाया है
अपने मुख का टुकड़ा भी माँ ने तुम्हे खिलाया है
ऐसी भोली माँ के दिल को तुम ठेस लगाओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न

है माँ ममता की खान
कहते है वेद पुराण - २

फिर पकड़ के उंगली माँ ने तुमको चलना सीखलाया
दी कदम - कदम पर माँ ने अपने आँचल की छाया
जब लगा बोलने नाम यही पहले लब पर आया
तेरी इन बातों में माँ ने सच्चा सुख है पाया
दे खून जिगर का सीची तेरी जीवन फुलवारी
तेरी तुतलाती बोली पर माँ जाये बलहारी
अपने स्तन का दूध पिलाकर तुमको बड़ा किया.
देकर के अपने संस्कार पैरों पर खड़ा किया.
माँ के त्यागों की गाथा को तुम यूँ बिसराओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न

है माँ ममता की खान
कहते है वेद पुराण - २

अब और सुनो सज्जन तुमको एक कथा सुनते है
माँ की ममता क्या होती है हम तुम्हे बताते है

"एक नगर में एक माँ अपने बेटे के संग रहती थी
बेटे के ख़ुशी की खातिर वोह क्या क्या दुःख सहती थी
नाकारा बेटा था उसका कुछ काम न करता था
बेमकसद, आवारा, गलियों में वोह घुमा करता था
बेचारी माँ मजदूरी करके घर चलाती थी
फिर भी नहीं शिकवा कोई होंठों पर लाती थी
ऐसी माँ के अंचल पर कोई दाग लगाओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न

है माँ ममता की खान
कहते है वेद पुराण - २

उस माँ का बेटा, प्रेम एक लड़की से करता था
दीवाना बन खयालो में उसी के खोया रहता था
इकरार किया  लड़की से उसने दिल की बात कह दी
दुल्हन बन जाओ तुम मेरी, कर लो मुझसे शादी
लड़की बोली कर सकते हो तुम सच्चा प्यार नहीं
धोखा दे जाओगे तुम मुझको, तुम पर ऐतबार नहीं
लड़का बोला जो यकीन नहीं, तुम मुझको अजमा लो
दुनिया की कोई भी वस्तु तुम मुझसे मंगवा लो
लड़की बोली जाओ जाओ यूँ बात बनाओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न

है माँ ममता की खान
कहते है वेद पुराण - २

लड़की ने कहाँ अपनी माँ का दिल मुझको लाकर दो
करते हो सच्चा प्यार मुझे तुम यह साबित कर दो
इतनी सुनते ही उछल पड़ा वोह जालिम अनन्याई
चल पड़ा जिगर लेने माँ का न लाज शर्म आई 
भूखी प्यासी माँ के दिल पर झट उसने वार किया
बेदर्दी में खंजर माँ के सीने में पार किया
चल पड़ा जिगर लेकर वोह ज़ालिम हत्यारा
चढ़ने न दिया चौखट पर उस लड़की ने दुत्कारा
ओ कातिल माँ के मुझको अपनी शक्ल दिखाओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न

है माँ ममता की खान
कहते है वेद पुराण - २

लड़की बोली जा नीच बुरा तुझसे क्या होगा
जो हुआ न अपनी जननी का वोह मेरा क्या होगा
ले चली पकड़कर पुलिस उसे दिल माँ का डोल उठा
बेटे को देख मुसीबत में दिल माँ का बोल उठा
निर्दोष है मेरे लाल छोड़ दो दिल के टुकड़े को
फिर और कहाँ से लाऊँगी मैं चाँद से मुखड़े को
सुनकर यह बेटा तड़प उठा और बोला रो रो कर
दुनिया मेरी वीरान हुई ये माँ तुझको खोकर
बनकर कपूत उसकी राहों में शूल बिछाओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न

है माँ ममता की खान
कहते है वेद पुराण - २"

माँ जैसी पावन ममता न दूजी संसार में
सब कुछ निछावर कर देती बच्चों के प्यार में
इस एक शब्द में छुपी है सारी दुनिया की दौलत
माँ ही मंदिर, माँ ही पूजा और माँ ही है जन्नत
इसके चरणों की सेवा से जीवन धन्य कर लो
इसकी ममता की दौलत से दामन अपना भर लो
भगवान से भी ऊचाँ दर्जा माता का होता है
जो ठुकराये ममता इनकी निरभागी होता है
ठुकरा के जीवन अपना नरक बनाओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न

है माँ ममता की खान
कहते है वेद पुराण - २

 हर बात भुला दो जीवन में यह बात भुलाओ न
यह बात भुलाओ न
जीवन देने वाली माँ का दिल कभी दुखाओ न
यह बात भुलाओ न

है माँ ममता की खान
कहते है वेद पुराण - ४

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