Tuesday, 1 November 2011

मंगल भवन अमंगल हारी।

मंगल भवन अमंगल हारी। उमा सहित जेहि जपत पुरारी।। ((बालकाण्ड १-११-२)

श्री रघुनाथजी का नाम अत्यन्त पवित्र है, वेद-पुराणों का सार है, कल्याण का भवन है और अमंगलों को हरने वाला है, इन्हें पार्वतीजी सहित भगवान शिवजी सदा जपा करते हैं॥

मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।। (बालकाण्ड १-१११-४)

मंगल के धाम, अमंगल के हरने वाले और श्री दशरथजी के आँगन में खेलने वाले (बालरूप) श्री रामचन्द्रजी मुझ पर कृपा करें॥

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