Tuesday, 23 August 2011

Sita Ram Sita Ram Kahiye - सीता राम सीता राम सीताराम कहिये .


सीता राम सीता राम 
सीता राम सीता राम सीताराम कहिये .
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये ..

मुख में हो राम नाम राम सेवा हाथ में .
तू अकेला नाहिं प्यारे राम तेरे साथ में .
विधि का विधान जान हानि लाभ सहिये .

किया अभिमान तो फिर मान नहीं पायेगा .
होगा प्यारे वही जो श्री रामजी को भायेगा .
फल आशा त्याग शुभ कर्म करते रहिये .

ज़िन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के .
महलों मे राखे चाहे झोंपड़ी मे वास दे .
धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिये .

आशा एक रामजी से दूजी आशा छोड़ दे .
नाता एक रामजी से दूजे नाते तोड़ दे .
साधु संग राम रंग अंग अंग रंगिये .
काम रस त्याग प्यारे राम रस पगिये .

सीता राम सीता राम सीताराम कहिये .
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये ..

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