Tuesday, 9 August 2011

श्री हनुमान जी के चरित्र

श्री हनुमान जी के चरित्र में ये ७ बहुत महत्वपूर्ण हैं:

१. विश्वास (उन्हें श्री राम की कृपा पे पूर्ण, अडिग विशवास है)

२. विचार (श्री हनुमान जी का अपना कोई विचार नहीं, वे प्रभु के विचारों को हे शिरोधार्य करते हैं)

३. विवेक (श्री हनुमान जी को पूर्ण विवेक है की कौन सी वस्तु स्थायी है - जैसे भक्ति, सेवा एवं कौन सी वस्तु क्षणिक है जैसे धन, मान आदि)

४. वैराग्य (श्री हनुमान जी वैराग्य की प्रतिमूर्ति हैं, उन्हें लोभ छू नहीं सकता )

५. विश्राम (श्री राम कार्य किये बिना हनुमान जी विश्राम नहीं लेते)

६. विशालता (केवल शरीर की ही नहीं, ह्रदय की विशालता)

७. विषाद (प्रभु से क्षणिक दूर होने पर भी विषाद एवं प्रभु के साक्षात्कार की उत्कंठा)

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