Tuesday, 23 August 2011

कभी कभी भगवान को भी, भक्तों से काम पडे |

कभी कभी भगवान को भी, भक्तों से काम पडे |
जाना था गंगा पार, प्रभू केवट की नाव चढें ||

अवध छोड प्रभू ,वन को धायें, सियाराम लखन गंगा तट आये,
केवट मन ही मन हरषायें, घर बैंठे प्रभू दर्शन पाये |
हाथ जोड प्रभू के आगे ,केवट मगन खडें 
||

प्रभू बोले तुम नाव चलाओ , पार हमें केवट पहुँचाओ ,
केवट बोला सुनो हमारी, चरण धूली की महिमा हैं भारी |
मैं गरिब हूँ नैया हैं मेरी,ना नारी होय पडे..||

केवट दौड के जल भर लाये, चरण धोये चरणमृत पाये ,
वेद ग्रंथ जिनके यश गाये ,केवट उनको नाव चढायें |
बरसे ढुल गगन से ऐसे भक्तों के भाग्य बडे | |

चली नाव गंगा की धारा ,सियाराम लखन को पार उतारा,
देने लगे प्रभू नाव उतराई, केंवट कहे नहीं रघुराई |
पार किया मैने प्रभू तुमको, अब तुम मोहें पार करो 
||

कभी कभी भगवान को भी, भक्तों से काम पडे |
जाना था गंगा पार, प्रभू केवट की नाव चढें ||

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