Friday, 29 July 2011

Sri Krishna's name

Sri Krishna's name - pill for every illness;
Sri Krishna's name - pal for every loneliness;
Sri Krishna's name - energy for every weakness;
Sri Krishna's name - inspiration for every kindness.

श्री वृन्दावन सो वन नहीं, श्री नंदगाँव सो गाँव |

श्री वृन्दावन सो वन नहीं, श्री नंदगाँव सो गाँव | 
श्री बंसीवट सो वट नहीं, श्री कृष्ण नाम सो नाम || 

जय जय श्री राधा माधव ||

Sri Krishna resides in the heart of His believers.

Sri Krishna gave mercy to sinners;
Sri Krishna gave assets to beggars;
Sri Krishna gave love to the lonely;
Sri Krishna gave blessings to devotees;
Sri Krishna gave Himself to His lovers;
Sri Krishna resides in the heart of His believers.

‎!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !!

‎!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !!
!! हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !!
!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !!
!! हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !!
!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !!
!! हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !!
!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !!
!! हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !!

Monday, 25 July 2011

Ganpati Suno Vandana Sabki


Ganpati Suno Vandana Sabki
Dono Haath Jodhkar Aaye Sharan Tumhari!
~*~
Veenati Itni Hain Daata
Rakhana Sabka Dhyan
Poori Karna Sabki Iccha
Aaye Gajanan, Dayanidaan!
~*~
Pratham Pujha Aap Ho
Sab Mangal Karte Daata
Siddhi-Buddhi Daine Wale
Sukh Daayak Bhagyavidhata!
~*~
Modak Ka Bhog Lagaye Romil
Phool Chadhaye Sab Nar-Naari
Ganpati Suno Vandana Sabki
Dono Haath Jodhkar Aaye Sharan Tumhari!

Friday, 22 July 2011

श्री माँ वैभव लक्ष्मी माता व्रत कथा - हिंदी

एक समय की बात है कि एक शहर में एक शीला नाम की स्त्री अपने पति के साथ रहती थी. शीला स्वभाव से धार्मिक प्रवृ्ति की थी. और भगवान की कृ्पा से उसे जो भी प्राप्त हुआ था, वह उसी में संतोष करती थी. शहरी जीवन वह जरूर व्यतीत कर रही थी, परन्तु शहर के जीवन का रंग उसपर नहीं चढा था. भजन-कीर्तन, भक्ति-भाव और परोपकार का भाव उसमें अभी भी था. 

वह अपने पति और अपनी ग्रहस्थी में प्रसन्न थी. आस-पडौस के लोग भी उसकी सराहना किया करते थें. देखते ही देखते समय बदला और उसका पति कुसंगति का शिकार हो गया. वह शीघ्र अमीर होने का ख्वाब देखने लगा. अधिक से अधिक धन प्राप्त करने के लालच में वह गलत मार्ग पर चल पडा, जीवन में रास्ते से भटकने के कारण उसकी स्थिति भिखारी जैसी हो गई. बुरे मित्रों के साथ रहने के कारण उसमें शराब, जुआ, रेस और नशीले पदार्थों का सेवन करने की आदत उसे पड गई. इन गंदी आदतों में उसने अपना सब धन गंवा दिया. 

अपने घर और अपने पति की यह स्थिति देख कर शीला बहुत दु:खी रहने लगी. परन्तु वह भगवान पर आस्था रखने वाली स्त्री थी. उसे अपने देव पर पूरा विश्वास था. एक दिन दोपहर के समय उसके घर के दरवाजे पर किसी ने आवाज दी. दरवाजा खोलने पर सामने पडौस की माता जी खडी थी. माता के चेहरे पर एक विशेष तेज था. वह करूणा और स्नेह कि देवी नजर आ रही थ. शीला उस मांजी को घर के अन्दर ले आई. घर में बैठने के लिये कुछ खास व्यवस्था नहीं थी. शीला ने एक फटी हुई चादर पर उसे बिठाया. माँजी बोलीं- क्यों शीला! मुझे पहचाना नहीं? हर शुक्रवार को लक्ष्मीजी के मंदिर में भजन-कीर्तन के समय मैं भी वहाँ आती हूँ.' इसके बावजूद शीला कुछ समझ नहीं पा रही थी, फिर माँजी बोलीं- 'तुम बहुत दिनों से मंदिर नहीं आईं अतः मैं तुम्हें देखने चली आई.'

माँ जी के अति प्रेम भरे शब्दों से शीला का हृदय पिघल गया. माँ जी के व्यवहार से शीला को काफी संबल मिला और सुख की आस में उसने माँ जी को अपनी सारी कहानी कह सुनाई। कहानी सुनकर माँ जी ने कहा - माँ लक्ष्मी जी तो प्रेम और करुणा की अवतार हैं. वे अपने भक्तों पर हमेशा ममता रखती हैं. इसलिए तू धैर्य रखकर माँ लक्ष्मीजी का व्रत कर. इससे सब कुछ ठीक हो जाएगा.' शीला के पूछने पर माँ जी ने उसे व्रत की सारी विधि भी बताई. माँ जी ने कहा- 'बेटी! माँ लक्ष्मी जी का व्रत बहुत सरल है. उसे 'वरदलक्ष्मी व्रत' या 'वैभवलक्ष्मी व्रत' कहा जाता है. यह व्रत करने वाले की सब मनोकामना पूर्ण होती है. वह सुख-संपत्ति और यश प्राप्त करता है.'

शीला यह सुनकर आनंदित हो गई. शीला ने संकल्प करके आँखें खोली तो सामने कोई न था. वह विस्मित हो गई कि माँजी कहाँ गईं? शीला को तत्काल यह समझते देर न लगी कि माँजी और कोई नहीं साक्षात्‌ लक्ष्मीजी ही थीं.

दूसरे दिन शुक्रवार था. सबेरे स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनकर शीला ने माँजी द्वारा बताई विधि से पूरे मन से व्रत किया. आखिरी में प्रसाद वितरण हुआ. यह प्रसाद पहले पति को खिलाया. प्रसाद खाते ही पति के स्वभाव में फर्क पड़ गया. उस दिन उसने शीला को मारा नहीं, सताया भी नहीं. उनके मन में 'वैभवलक्ष्मी व्रत' के लिए श्रद्धा बढ़ गई.

शीला ने पूर्ण श्रद्धा-भक्ति से इक्कीस शुक्रवार तक 'वैभवलक्ष्मी व्रत' किया. इक्कीसवें शुक्रवार को माँजी के कहे मुताबिक उद्यापन विधि कर के सात स्त्रियों को 'वैभवलक्ष्मी व्रत' की सात पुस्तकें उपहार में दीं. फिर माताजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करने लगीं- 'हे माँ धनलक्ष्मी! मैंने आपका 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है. हे माँ! मेरी हर विपत्ति दूर करो. हमारा सबका कल्याण करो. जिसे संतान न हो, उसे संतान देना. सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना. कुँआरी लड़की को मनभावन पति देना. जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना. सभी को सुखी करना. हे माँ! आपकी महिमा अपार है.' ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के 'धनलक्ष्मी स्वरूप' की छबि को प्रणाम किया.

व्रत के प्रभाव से शीला का पति अच्छा आदमी बन गया और कड़ी मेहनत करके व्यवसाय करने लगा. उसने तुरंत शीला के गिरवी रखे गहने छुड़ा लिए. घर में धन की बाढ़ सी आ गई. घर में पहले जैसी सुख-शांति छा गई. 'वैभवलक्ष्मी व्रत' का प्रभाव देखकर मोहल्ले की दूसरी स्त्रियाँ भी विधिपूर्वक 'वैभवलक्ष्मी व्रत' करने लगीं.

श्री माँ वैभव लक्ष्मी माता जी की आरती

श्री माँ वैभव लक्ष्मी माता जी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुमको निशदिन सेवत, हरी विष्णु विधाता; ॐ जय लक्ष्मी माता.

उमा रमा ब्रह्मणि तुम्ही जगमाता,
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता; ओं जय लक्ष्मी माता.

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता,
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि सिद्धि धन पाता; ॐ जय लक्ष्मी माता.

तुम पातळ निवासिनी, तुम ही शुभ दाता,
कर्म प्रभाव् प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता; ॐ जय लक्ष्मी माता.

जिस घर में तुम रहती, सुब सद्गुण आता,
सुब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता; ॐ जय लक्ष्मी माता.

तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता,
खान पान का वैभव, सुब तुमसे आता; ॐ जय लक्ष्मी माता.

शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता,
रतन चतुर्श्दुश तुन बिन, कोई नहीं पाता; ॐ जय लक्ष्मी माता.

महा लक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता,
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता; ॐ जय लक्ष्मी माता.

बोलो महा लक्ष्मी जी की जय!!

Bhagwan Meri Naiya Us Paar Laga Dena

Oh Lord, please continue to be my savior and Protector.
Until now You have taken great care of me. 
Please continue to do so in the future.

It is very possible that I may forget you because of my delusion in this material world, but I beg of You even if I do, You please do not forget me.
This powerful maya of this world is ever ready to attack me.

Do not be an onlooker, please come to my rescue.

You are the" Isht" devta, I am the worshiper.
If this relationship is true, it is a fulfillment of my desire.

Bhagwan Meri Naiya Us Paar Laga Dena



Bhagwan meri naiya us paar laga dena
Bhagwan meri naiya us paar laga dena
Ab tak to nibhaya hai, aage bhi nibha dena
Bhagwan meri naiya us paar laga dena
Ab tak to nibhaya hei, aage bhi nibha dena.

Hum deen dukhi nirbal, ek naam rahe pratipal....hoji hooo
Yeh soch daras doge, prabhu aaj nahi to kal
Jo baag lagaya hai, phoolo se saja dena.
Bhagwan meri naiya us paar laga dena
Ab tak to nibhaya hai, aage bhi nibha dena.

Tum shanti sudhakar ho, tum gyan divakar ho...hoji...hoooo
Mum hans chuge moti, tum maan sarovar ho
Do bund sudha ras ki, hum ko bhi pila dena.
Bhagwan meri naiya us paar laga dena
Ab tak to nibhaya hai, aage bhi nibha dena

Rokoge bhala kab tak, darshan ko mujhe tumse...hoji...hooo
Charno se lipat jaaun, vruksho ki lata jaise...
Ab dwar khadi tere, mujhe raah dikha dena
Bhagwan meri naiya us paar laga dena
Ab tak to nibhaya hai, aage bhi nibha dena.

Wednesday, 20 July 2011

Radhe Krishna Ki Jyoti Alaukik Tino Lok Mein Chhaaye Rahi Hai


radhe krishna ki jyoti
alaukik tino lok mein chhaaye rahi hai
bhakti vivash ek prem pujaarin
phir bhi deep jalaaye rahi hai

krishna ko gokul se radhe ko - 2
barasaane se bulaaye rahi hai
dono karo swikaar kripaa kar

jogan aarati gaaye rahi hai - 2
bhor bhaye ti saanj dhale tak
sevaa kaun itane mahaamaro
snaan karaaye wo vastra odhaaye
vo bhog lagaaye wo laagat pyaaro

kabase niharat aapaki aur - 2
ki aap hamaari aur nihaaron
raadhe krishnaa hamaare dhaam ko
jaani vrindaawan dhaam padhaaro - 2

Tuesday, 19 July 2011

Bhala Kisi ka Kar Na Sako to Bura Kisi ka Mat Karna!



(Bhala kisi ka kar na sako to,
Bura kisi ka mat karna…
Pusp nahin ban sakte to tum,
Kaante ban kar mat rehna)….3


(Ban na sako bhagwaan agar tum,
Kam se kam insaan bano…
Nahin kabhi seitaan bano,
Nahin kabhi heiwaan bano)…2
Sadaachaar apnaa na sako to,
Paapo mein pad mat dharna…
Pusp nahin ban sakte to tum,
Kaante ban kar mat rehna….
Bhala kisi ka kar na sako to,
Bura kisi ka mat karna…
Pusp nahin ban sakte to tum,
Kaante ban kar mat rehna….


(Satya vachan na bole sako to,
Jhut kabhi bhi mat bolo….
Mon raho to hi achcha,
Kam se kam vish to mat gholo)…2
Bolo yadi pehle tum tolo,
Phir munh ko khola karna….
Pusp nahin ban sakte to tum,
Kaante ban kar mat rehna….
Bhala kisi ka kar na sako to,
Bura kisi ka mat karna…
Pusp nahin ban sakte to tum,
Kaante ban kar mat rehna….


(Ghar na kisi basaa sako to,
Jhopadiya na jalaa dena…
Marham patti kar na sako to,
Khaar namak na lagaa dena)….2
Deepak ban kar jal na sako to,
Andhiyaara bhi mat karna….
Pusp nahin ban sakte to tum,
Kaante ban kar mat rehna….
Bhala kisi ka kar na sako to,
Bura kisi ka mat karna…
Pusp nahin ban sakte to tum,
Kaante ban kar mat rehna….


(Amrit pila sako na kisi ko,
Zeher pila ke bhi darna….
Dheeraj bandha nahin sakte to,
Ghaav kisi ke mat karna)….2
Raam naam ki maala lekar,
Subho shaam bhajan karna…
Pusp nahin ban sakte to tum,
Kaante ban kar mat rehna….
Bhala kisi ka kar na sako to,
Bura kisi ka mat karna…
Pusp nahin ban sakte to tum,
Kaante ban kar mat rehna….

aaj mangalwar hai mahaveer ka vaar hai

aaj mangalwar hai mahaveer ka vaar hai 
sacche man se jo koi dhyawe 
uska beda paar hai hanuman

Monday, 18 July 2011

धर्म की विजय हो , अधर्म का विनाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो |

धर्म की विजय हो, 
अधर्म का विनाश हो, 
प्राणियों में सद्भावना हो, 
विश्व का कल्याण हो |

Friday, 15 July 2011

Kabhi Pyase Ko Pani Pilaya Nahin Baad Amrit Pilane Se Kya Faida - Kumar Vishu


KABHI PYASE KO PANI PILAYA NAHI
BAAD AMRIT PILANE SE KYA FAIDA
KABHI GIRATE HUVE KO UTHAYA NAHI
BAAD AASU BAHANE SE KYA FAIDA

MEIN TO MANDIR GAYA, PUJA AARTI KI
PUJA KARTE HUE YEH KHAYAL AA GAYA - 2
KABHI MAA-BAAP KI SEVA KI HI NAHI
SIRF PUJA KE KARNE SE KYA FAIDA

MEIN TO SATSANG GAYA, GURUBANI SUNI
GURUBANI KO SUNKAR KHAYAL AA GAYA - 2
JANAM MANAV KA LEKE DAYA NA KARI
FIR MANAV KEHLANE SE KYA FAIDA

MAINE DAAN KIYA, MAINE JAPTAP KIYA
DAAN KARTE HUVE YE KHAYAL AA GAYA - 2
KABHI BHUKHE KO BHOJAN KHILAYA NAHI
DAAN LAKHON KA KARNE SE KYA FAIDA.

GANGA NAHANE HARIDWAR-KASHI GAYA
GANGA NAHATE HI MAAN MEIN KHAYAL AA GAYA  - 2
TAAN KO DHOYA MAGAR MAAN KO DHOYA NAHI
FIR GANGA NAHANE SE KYA FAIDA

MAINE VED PADHE, MAINE SHASHTRA PADHE
SHASHTRA PADHATE HUE YEH KHAYAL AA GAYA - 2
MAINE GYAN HI KISI KO BATA NAHI
FIR GYANI KEHLANE SE KYA FAIDA

MAAT-PITA KE HI CHARNO MEIN CHARON DHAM HAIN
AAJA AAJA YAHI MUKTI KA DHAM HAIN - 2
PITA-MATA KI SEVA KI HI NAHI
FIR TIRTHO MEIN JAANE SE KYA FAIDA

“Grur Bramaah – Gurur Vishnuh – Gurur Devo Maheshwarah | Gurur Saakshaat – Param Brahma -tasmai Shri Gurave Namah ||”

“Grur Bramaah – Gurur Vishnuh – Gurur Devo Maheshwarah |
Gurur Saakshaat – Param Brahma -tasmai Shri Gurave Namah ||”

Dhyaana moolam guror murtih; Pooja moolam guror padam; Mantra moolam guror vakyam; Moksha moolam guror kripa.

"The Guru's form should be meditated upon; the feet of the Guru should be worshipped; his words are to be treated as a sacred Mantra; his Grace ensures final liberation".

Dhyaana moolam guror murtih;
Pooja moolam guror padam;
Mantra moolam guror vakyam;
Moksha moolam guror kripa.

हरिहर आदिक जगत में पूज्य देव जो कोय । सदगुरु की पूजा किये सबकी पूजा होय ॥

हरिहर आदिक जगत में पूज्य देव जो कोय । 
सदगुरु की पूजा किये सबकी पूजा होय ॥

गुरु-गोविंद दोउ खड़े, काके लागू पाय, बलिहारी गुरु आपने, जिन्ह गोविंद दियो बताय.

गुरु-गोविंद दोउ खड़े, काके लागू पाय, 
बलिहारी गुरु आपने, जिन्ह गोविंद दियो बताय.

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः । गुरुः साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः ।
गुरुः साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

Thursday, 14 July 2011

Sai Ram Sai Shyam

Sai Ram, Sai Shyam,Sai Ram, Sai Shyam
Jag mein sacho tero naam. Sai Ram...Sai Shyam

Tu hi mata, tu hi pita hai;
Tu hi thoa hai sairam.

Tu antaryami, saba ka Swami;
tere charno me charo dham.

Tu hi bigade, tu hi saware,
Es jag ke sare kaam.

Tu hi jagdatta, vishava Vidhata;
Tu hi subah ho, tu hi sham.

Sai Ram, Sai Shyam,Sai Ram, Sai Shyam
Jag mein sacho tero naam. Sai Ram...

Sai Ram, Sai Shyam,Sai Ram, Sai Shyam
Sai Ram, Sai Shyam,Sai Ram, Sai Shyam

Jag mein sacho tero naam. Sai Ram...Sai Shyam

Tu hi mata, tu hi pita hai;
Tu hi thoa hai sairam.
Tu antaryami, saba ka Swami; tere charno me charo dham.

Tu hi bigade, tu hi saware,Es jag ke sare kaam. 

Tu hi jagdatta , vishava Vidhata; 
Tu hi subah ho, tu hi sham.

Sai Ram, Sai Shyam,Sai Ram, Sai Shyam
Sai Ram, Sai Shyam,Sai Ram, Sai Shyam

Jag mein sacho tero naam. Sai Ram...
Your name is the only truth in universe Sai Ram!!

Prayer For Happiness

Aum Sarve Vai Sukhhinah Santu
Sarve Santu Niraamayaah
Sarve Bhadraani Pashyantu
Maa Kaschid Dukhamaapnuyaat
Aum Shanti Shanti Shanti.


Meaning

May all be happy.
May all be healthy (free from disease).
May all see auspiciousness.
May none suffer.
Aum Peace Peace Peace
Peace for self.
Peace for neighbours.
Peace for the entire world.

Sainath Tere Hazaaron Haath



Tu hi fakeer
Tu hi hai raja
Tu hi hai Sai
Tu hi hai Baba

SaiNath
SaiNath
(SaiNath tere hazaron haath) 2
(Jis Jis ne tera naam liya) 2
Tu ho liya uske saath

SaiNath
SaiNath
SaiNath tere hazaron haath
Sai nath tere hazaron hath
(Jis Jis ne tera naam liya) 2
Tu ho liya uske saath

SaiNath
SaiNath
(SaiNath tere hazaron hath)2

Is dekhoon to tu laage Kanhaiya
Us dekhoon to Durga maiya
Is dekhoon to ho hooo
Is dekhoon to tu laage Kanhaiya
Us dekhoon to Durga maiya
Nanakh ki muskaan hai mukh par

Shaan e Mohammad bhi hai mukh par
Shaan e Mohammad bhi hai mukh par
saiNath
SaiNath
(SaiNath tere hazaron hath)2

Ram Naam ki hai tu mala
Gautam wala Tujh mein ujaala
Ram Naam ki hai tu mala
Gautam wala Tujh mein ujaala

Neem tere ki jeene ki chaaya
Badle har sone ki kaya
Badle har sone ki kaya
saiNath
SaiNath
(SaiNath tere hazaron hath)2

Tera dar hai daya ka saagar
Sab mazhab bharte hai gaagar
Tera dar hai hooooo

Tera dar hai daya ka saagar
Sab mazhab bharte hai gaagar
Pawan paaras teri yaad
(Tera patthar kankan raag)2

SaiNath
SaiNath
(SaiNath tere hazaron hath)2

Tera mandir sabka Madeena
Jo bhi aye seekhe jeena
Tera mandir sabka Madeena
Jo bhi aye seekhe jeena
Tu chahhe to khal jaye hath
Tu hi Bhola tu hi Nath
Tu hi Bhola Tu hi Nath

SaiNath
SaiNath
(SaiNath tere hazaron hath)2
(Jis Jis ne tera naam liya) 2
Tu ho liya uske saath
SaiNath
SaiNath
(SaiNath tere hazaron hath)2

Tuesday, 12 July 2011

Duniya Chale na Shri Ram ke bina

Duniya Chale na Shri Ram ke bina

Duniya Chale na Shri Ram ke bina 
Duniya chale na Shri Ram ke bina, Ramji Chale na Hanumaan ke Bina

Baali ka marna muskil tha, Sugriv ka milna jaruri tha
Baali mare na Shri Ram ke bina, Ram ke bina, Sugriv mile na Hanumaan ke bina

Duniya chale na Shri Ram ke bina, Ram ke Bina, Ramji Chale na Hanumaan ke Bina

Sitaji ka milna muskil tha, Pata lagana jaruri tha
Sitaji mile na Shri Ram ke bina, Ram ke bina, Pata Chale na Hanumaan ke bina

Duniya chale na Shri Ram ke bina, Ram ke Bina, Ramji Chale na Hanumaan ke Bina

Laxman ka bachna muskil tha, Buti lana jaruri tha
Laxman bache na Shri Ram ke bina, Ram ke bina, Buti mile na Hanumaan ke bina

Duniya chale na Shri Ram ke bina, Ram ke Bina, Ramji Chale na Hanumaan ke Bina

Raavan ka marna muskil tha, Lanka ka jalna jaruri tha
Raavan mare na Shri Ram ke bina, Ram ke bina, Lanka jale na Hanumaan ke bina

Duniya chale na Shri Ram ke bina, Ram ke Bina, Ramji Chale na Hanumaan ke Bina

Sankat Mochan Hanuman Ashtak

Sankat Mochan Hanuman Ashtak

Baal Samai Rabi Bhakshi Liyo Tabateenahu Loka Bhayo Andhiyaro
Taahi So Traas Bhayo Jaga Ko Yaha Sankat Kaahu So Jaat Na Taaro
Dewan Aani Kari Binatee Tabh Shaadh Diyo Rabi Kashta Niwaaro
Ko Nahin Jaanat Hai Jaga May Kapi Sankat Mochan Naam Tiharo

Baali Ki Traas Kapees Basai Giri Jaat Mahaa Prabhu Pantha Nihaaro
Chownkee Maha Muni Saap Diyo Tab Chahiyay Kown Bichaar Bichaaro
Kai Dwija Roop Liwaaya Mahaa Prabhu So Tuma Daas Kay Soka Niwaaro
Ko Nahin Jaanat Hai Jaga May Kapi Sankat Mochan Naam Tiharo

Angad Kay Sanga Layna Gayay Siya Koja Kapees Yaha Baina Uchaaro
Jeevat Na Bachihow Hum So Ju Bina Sudhi Laaya Ehaan Pagu Dhaaro
Hayri Thakay Tatta Sindhu Sabai Taba Laaya Siya Sudhi Praan Ubaaro
Ko Nahin Jaanat Hai Jaga May Kapi Sankat Mochan Naam Tiharo

Raavana Traas Dayee Siya So Saba Raakshashi So Kahi Soka Nivaaro
Taahi Samaya Hanuman Mahaprabhu Jaaya Mahaa Rajnee Charamaaro
Chaahat Siya Asoka So Aagi Su Dai Prabhu Mudrika Soka Nivaaro
Ko Nahin Jaanat Hai Jaga May Kapi Sankat Mochan Naam Tihaaro

Baanlagyo Ura Lashiman Kay Taba Praan Tajay Suta Raavana Maaro
Lai Griha Baidya Sukhena Sameta Tabai Giri Drona So Beera Ubhaaro
Aani Sajeewan Hatha Dayee Taba Lashiman Kay Tum Praana Ubhaaro
Ko Nahin Jaanat Hai Jaga May Kapi Sankat Mochan Naam Tihaaro

Raavana Juddha Ajaan Kiyo Taba Naaga Kin Phaas Sabhi Sira Daaro
Sri Raghunath Samet Sabai Dak Moha Bhaya Yaha Sankat Bhaaro
Aani Khagesa Tabai Hanumaan Ju Bhandan Kaati Sutraas Nivaaro
Ko Nahin Jaanat Hain Jaga May Kapi Sankat Mochan Naam Tiharo

Bhandhu Samet Jabai Ahi Raavana Lai Raghunath Pataal Sidhaaro
Debihi Puji Bhali Bidhin So Bali Dewoo Sabai Mili Mantra Vichaaro
Jaaya Sahaaya Bhayo Taba Hi Ahi Raavana Sainya Samet Sanghaaro
Ko Nahin Jaanat Hain Jaga May Kapi Sankat Mochan Naam Tihaaro

Kaaja Kiyay Bara Dewan Kay Tum Beera Mahaa Prabhu Dekhi Bichaaro
Kown So Sankat Mora Gaib Ko Jo Tum So Nahin Jaat Hai Taaro
Baygi Haro Hanumaan Haha Prabhu Jo Kucha Sankat Hoya Ha Maaro
Ko Nahin Jaanat Hai Jaga May Kapi Sankat Mochan Naam Tiharo

Laal Deha Laalee Lasey,
Aru Dhari Laal Langoora
Bajra Deha Daanawa Dalana,
Jai Jai Jai Kapi Soora
Mahabir Swami Ki Jai
Sanatan Dharma ki Jai

रामायण मनका 108

रामायण मनका 108


रघुपति राघव राजाराम। पतित पावन सीताराम॥
जय रघुनन्दन जय घनशाम। पतित पावन सीताराम॥


भीड़ पड़ी जब भक्त पुकारे। दूर करो प्रभु दु:ख हमारे॥
दशरथ के घर जन्में राम। पतित पावन सीताराम॥१॥


विश्वामित्र मुनीश्वर आए। दशरथ भूप से वचन सुनाये।
संग में भेजे लक्ष्मण राम। पतित पावन सीताराम॥२॥


वन में जाय ताड़का मारी। चरण छुआय अहिल्या तारी॥
ऋषियों के दु:ख हरते राम। पतित पावन सीताराम॥३॥


जनकपुरी रघुनन्दन आए। नगर निवासी दर्शन पाए॥
सीता के मन भाये राम। पतित पावन सीताराम॥४॥


रघुनन्दन ने धनुष चढाया। सब राजों का मान घटाया॥
सीता ने वर पाये राम। पतित पावन सीताराम॥५॥


परशुराम क्रोधित हो आए। दुष्ट भूप मन में हरषाये॥
जनकराय ने किया प्रणाम। पतित पावन सीताराम॥६॥


बोले लखन सुनो मुनि ज्ञानी। संत नहीं होते अभिमानी॥
मीठी वाणी बोले राम। पतित पावन सीताराम॥७॥


लक्ष्मण वचन ध्यान मत दीजो। जो कुछ दण्ड दास को दीजो॥
धनुष तुडइय्या मैं हूँ राम। पतित पावन सीताराम॥८॥


लेकर के यह धनुष चढाओ। अपनी शक्ति मुझे दिखाओ॥
छूवत चाप चढाये राम। पतित पावन सीताराम॥९॥


हुई उर्मिला लखन की नारी। श्रुतिकीर्ति रिपुसूदन प्यारी॥
हुई मांडवी भरत के वाम। पतित पावन सीताराम॥१०॥


अवधपुरी रघुनन्दन आए। घर-घर नारी मंगल गए॥
बारह वर्ष बिताये राम। पतित पावन सीताराम॥११॥


गुरु वशिष्ठ से आज्ञा लीनी। राजतिलक तैयारी कीनी॥
कल को होंगे राजा राम। पतित पावन सीताराम॥१२॥


कुटिल मंथरा ने बहकायी। केकैई ने यह बात सुनाई॥
दे दो मेरे दो वरदान। पतित पावन सीताराम॥१३॥


मेरी विनती तुम सुन लीजो। पुत्र भरत को गद्दी दीजो॥
होत प्रात: वन भेजो राम। पतित पावन सीताराम॥१४॥


धरनी गिरे भूप तत्काल। लागा दिल में शूल विशाल॥
तब सुमंत बुलवाये राम। पतित पावन सीताराम॥१५॥


राम, पिता को शीश नवाये। मुख से वचन कहा नहिं जाये॥
केकैयी वचन सुनायो राम। पतित पावन सीताराम॥१६॥


राजा के तुम प्राण प्यारे। इनके दुःख हरोगे सारे॥
अब तुम वन में जाओ राम। पतित पावन सीताराम॥१७॥


वन में चौदह वर्ष बिताओ। रघुकुल रीति नीति अपनाओ॥
आगे इच्छा तुम्हारी राम। पतित पावन सीताराम॥१८॥


सुनत वचन राघव हर्षाये। माता जी के मन्दिर आए॥
चरण-कमल में किया प्रणाम। पतित पावन सीताराम॥१९॥


माता जी मैं तो वन जाऊँ। चौदह वर्ष बाद फिर आऊं॥
चरण कमल देखूं सुख धाम। पतित पावन सीताराम॥२०॥


सुनी शूल सम जब यह बानी। भू पर गिरी कौशल्या रानी।
धीरज बंधा रहे श्री राम। पतित पावन सीताराम॥२१॥


समाचार सुनी लक्ष्मण आए। धनुष-बाण संग परम सुहाए॥
बोले संग चलूँगा राम। पतित पावन सीताराम॥ २२॥


सीताजी जब यह सुध पाईं। रंगमहल से निचे आईं॥
कौशल्या को किया प्रणाम। पतित पावन सीताराम॥ २३॥


मेरी चूक क्षमा कर दीजो। वन जाने की आज्ञा दीजो॥
सीता को समझाते राम। पतित पावन सीताराम॥२४॥


मेरी सीख सिया सुन लीजो। सास ससुर की सेवा कीजो॥
मुझको भी होगा विश्राम। पतित पावन सीताराम॥ २५॥


मेरा दोष बता प्रभु दीजो। संग मुझे सेवा में लीजो॥
अर्द्धांगिनी तुम्हारी राम। पतित पावन सीताराम॥ २६॥


राम लखन मिथिलेश कुमारी। बन जाने की करी तैयारी॥
रथ में बैठ गए सुख धाम। पतित पावन सीताराम॥ २७॥


अवधपुरी के सब नर-नारी। समाचार सुन व्याकुल भारी॥
मचा अवध में अति कोहराम। पतित पावन सीताराम॥२८॥


श्रृंगवेरपुर रघुबर आए। रथ को अवधपुरी लौटाए॥
गंगा तट पर आए राम। पतित पावन सीताराम॥ २९॥


केवट कहे चरण धुलवाओ। पीछे नौका में चढ़ जाओ॥
पत्थर कर दी नारी राम। पतित पावन सीताराम॥३०॥


लाया एक कठौता पानी। चरण-कमल धोये सुखमानी॥
नाव चढाये लक्ष्मण राम। पतित पावन सीताराम॥३१॥


उतराई में मुंदरी दीन्हीं। केवट ने यह विनती कीन्हीं॥
उतराई नहीं लूँगा राम। पतित पावन सीताराम॥३२॥


तुम आए हम घाट उतारे। हम आयेंगे घाट तुम्हारे॥
तब तुम पार लगाओ राम। पतित पावन सीताराम॥३३॥


भारद्वाज आश्रम पर आए। राम लखन ने शीष नवाए॥
एक रात कीन्हा विश्राम। पतित पावन सीताराम॥३४॥


भाई भरत अयोध्या आए। केकैई को यह वचन सुनाए॥
क्यों तुमने वन भेजे राम। पतित पावन सीताराम॥३५॥


चित्रकूट रघुनन्दन आए। वन को देख सिया सुख पाये॥
मिले भरत से भाई राम। पतित पावन सीताराम॥३६॥


अवधपुरी को चलिए भाई। ये सब केकैई की कुटिलाई॥
तनिक दोष नहीं मेरा राम। पतित पावन सीताराम॥३७॥


चरण पादुका तुम ले जाओ। पूजा कर दर्शन फल पाओ॥
भरत को कंठ लगाए राम। पतित पावन सीताराम॥ ३८॥


आगे चले राम रघुराया। निशाचरों का वंश मिटाया॥
ऋषियों के हुए पूरन काम। पतित पावन सीताराम॥ ३९॥


मुनिस्थान आए रघुराई। शूर्पणखा की नाक कटाई॥
खरदूषन को मारे राम।पतित पावन सीताराम॥ ४०॥


पंचवटी रघुनन्दन आए। कनक मृग 'मारीच' संग धाये॥
लक्ष्मण तुम्हे बुलाते राम। पतित पावन सीताराम॥ ४१॥


रावन साधु वेष में आया। भूख ने मुझको बहुत सताया॥
भिक्षा दो यह धर्म का काम। पतित पावन सीताराम॥ ४२॥


भिक्षा लेकर सीता आई। हाथ पकड़ रथ में बैठी॥
सूनी कुटिया देखी राम। पतित पावन सीताराम॥ ४३॥


धरनी गिरे राम रघुराई। सीता के बिन व्याकुलताई॥
हे प्रिय सीते, चीखे राम। पतित पावन सीता राम॥ ४४॥


लक्ष्मण, सीता छोड़ न आते। जनकदुलारी नहीं गवांते॥
तुमने सभी बिगाड़े काम। पतित पावन सीता राम॥ ४५॥


कोमल बदन सुहासिनी सीते। तुम बिन व्यर्थ रहेंगे जीते॥
लगे चाँदनी जैसे घाम। पतित पावन सीता राम॥ ४६॥


सुन री मैना, सुन रे तोता॥ मैं भी पंखों वाला होता॥
वन वन लेता ढूंढ तमाम। पतित पावन सीता राम॥ ४७॥


सुन रे गुलाब, चमेली जूही। चम्पा मुझे बता दे तू ही॥
सीता कहाँ पुकारे राम। पतित पावन सीताराम॥ ४८॥


हे नाग सुनो मेरे मन हारी। कहीं देखी हो जनक दुलारी॥
तेरी जैसी चोटी श्याम। पतित पावन सीताराम॥४९॥


श्यामा हिरनी तू ही बता दे। जनक-नंदिनी मुझे मिला दे॥
तेरे जैसी आँखें श्याम। पतित पावन सीताराम॥५०॥


हे अशोक मम शोक मिटा दे। चंद्रमुखी से मुझे मिला दे॥
होगा तेरा सच्चा नाम। पतित पावन सीताराम॥५१॥


वन वन ढूंढ रहे रघुराई। जनकदुलारी कहीं न पाई॥
गिद्धराज ने किया प्रणाम। पतित पावन सीताराम॥५२॥


चखचख कर फल शबरी लाई। प्रेम सहित पाये रघुराई॥
ऐसे मीठे नहीं हैं आम। पतित पावन सीताराम॥५३॥


विप्र रूप धरि हनुमत आए। चरण-कमल में शीश नवाए॥
कंधे पर बैठाये राम। पतित पावन सीताराम॥५४॥


सुग्रीव से करी मिताई। अपनी सारी कथा सुनाई॥
बाली पहुँचाया निज धाम। पतित पावन सीताराम॥५५॥


सिंहासन सुग्रीव बिठाया। मन में वह अति ही हर्षाया॥
वर्षा ऋतु आई हे राम। पतित पावन सीताराम॥५६॥


हे भाई लक्ष्मण तुम जाओ। वानरपति को यूँ समझाओ॥
सीता बिन व्याकुल हैं राम। पतित पावन सीताराम॥५७॥


देश-देश वानर भिजवाए। सागर के तट पर सब आए॥
सहते भूख, प्यास और घाम। पतित पावन सीताराम॥५८॥


सम्पाती ने पता बताया। सीता को रावण ले आया॥
सागर कूद गये हनुमान। पतित पावन सीताराम॥5९॥


कोने-कोने पता लगाया। भगत विभीषण का घर पाया॥
हनुमान ने किया प्रणाम। पतित पावन सीताराम॥६०॥


हनुमत अशोक वाटिका आए। वृक्ष तले सीता को पाए॥
आँसू बरसे आठों याम। पतित पावन सीताराम॥६१॥


रावण संग निशाचरी लाके। सीता को बोला समझा के॥
मेरी और तो देखो बाम। पतित पावन सीताराम॥६२॥


मंदोदरी बना दूँ दासी। सब सेवा में लंकावासी॥
करो भवन चलकर विश्राम। पतित पावन सीताराम॥६३॥


चाहे मस्तक कटे हमारा। मैं देखूं न बदन तुम्हारा॥
मेरे तन-मन-धन हैं राम। पतित पावन सीताराम॥६४॥


ऊपर से मुद्रिका गिराई। सीता जी ने कंठ लगाई॥
हनुमान ने किया प्रणाम। पतित पावन सीताराम॥६५॥


मुझको भेजा है रघुराया। सागर कूद यहाँ मैं आया॥
मैं हूँ राम-दास हनुमान॥ पतित पावन सीताराम॥६६॥


माता की आज्ञा मैं पाऊँ। भूख लगी मीठे फल खाऊँ॥
पीछे मैं लूँगा विश्राम। पतित पावन सीताराम॥६७॥


वृक्षों को मत हाथ लगाना। भूमि गिरे मधुर फल खाना॥
निशाचरों का है यह धाम। पतित पावन सीताराम॥६८॥


हनुमान ने वृक्ष उखाड़े। देख-देख माली ललकारे॥
मार-मार पहुंचाए धाम। पतित पावन सीताराम॥६९॥


अक्षय कुमार को स्वर्ग पहुँचाया। इन्द्रजीत फाँसी ले आया॥
ब्रह्मफांस से बंधे हनुमान। पतित पावन सीताराम॥ ७०॥


सीता को तुम लौटा दीजो। प्रभु से क्षमा याचना कीजो॥
तीन लोक के स्वामी राम। पतित पावन सीताराम॥ ७१॥


भगत विभीषन ने समझाया। रावण ने उसको धमकाया॥
सम्मुख देख रहे हनुमान। पतित पावन सीताराम॥ ७२॥


रुई, तेल, घृत, बसन मंगाई। पूँछ बाँध कर आग लगाई॥
पूँछ घुमाई है हनुमान। पतित पावन सीताराम॥ ७३॥


सब लंका में आग लगाई। सागर में जा पूँछ बुझाई॥
ह्रदय-कमल में राखे राम। पतित पावन सीताराम॥ ७४॥


सागर कूद लौटकर आए। समाचार रघुवर ने पाए।
जो माँगा सो दिया इनाम। पतित पावन सीताराम॥ ७५॥


वानर रीछ संग में लाए। लक्ष्मण सहित सिन्धु तट आए॥
लगे सुखाने सागर राम। पतित पावन सीताराम॥ ७६॥


सेतु कपि नल नील बनावें। राम राम लिख शिला तैरावें।
लंका पहुँचे राजा राम। पतित पावन सीताराम॥ ७७॥


निशाचरों की सेना आई। गरज तरज कर हुई लड़ाई॥
वानर बोले जय सियाराम पतित पावन सीताराम॥ ७८॥


इन्द्रजीत ने शक्ति चलाई। धरनी गिरे लखन मुरछाई।
चिंता करके रोये राम। पतित पावन सीताराम॥ ७९॥


जब मैं अवधपुरी से आया। हाय! पिता ने प्राण गंवाया॥
वन में गई चुराई वाम। पतित पावन सीताराम॥ ८०॥


भाई, तुमने भी छिटकाया। जीवन में कुछ सुख नहीं पाया॥
सेना में भारी कोहराम। पतित पावन सीताराम॥ ८१॥


जो संजीवनी बूटी को लाये। तो भी जीवित हो जाए॥
बूटी लायेगा हनुमान। पतित पावन सीताराम॥ ८२॥


जब बूटी का पता न पाया। पर्वत ही लेकर के आया॥
कालनेमि पहुँचाया धाम। पतित पावन सीताराम॥ ८३॥


भक्त भरत ने बाण चलाया। चोट लगी हनुमत लंग्दय॥
मुख से बोले जय सिया राम। पतित पावन सीताराम॥ ८४॥


बोले भरत बहुत पछता कर। पर्वत सहित बाण बिठा कर॥
तुम्हें मिला दूँ राजा राम । पतित पावन सीताराम॥ 85॥


बूटी लेकर हनुमत आया। लखन लाल उठ शीश नवाया।
हनुमत कंठ लगाये राम। पतित पावन सीता राम॥ ८६॥


कुम्भकरण उठ कर तब आया। एक बाण से उसे गिराया॥
इन्द्रजीत पहुँचाया धाम। पतित पावन सीता राम॥ ८७॥


दुर्गा पूजा रावण कीनो॥ नौ दिन तक आहार न लीनो॥
आसन बैठ किया है ध्यान। पतित पावन सीता राम॥88 ॥


रावण का व्रत खंडित किना। परम धाम पहुँचा ही दीना॥
वानर बोले जयसिया राम। पतित पावन सीता राम॥ 89 ॥


सीता ने हरि दर्शन किना। चिंता-शोक सभी ताज दीना॥
हंसकर बोले राजाराम। पतित पावन सीता राम॥ ९०॥


पहले अग्नि परीक्षा कराओ। पीछे निकट हमारे आओ॥
तुम हो पति व्रता हे बाम। पतित पावन सीता राम॥ ९१॥


करी परीक्षा कंठ लगाई। सब वानर-सेना हरषाई॥
राज विभीष्ण दीन्हा राम। पतित पावन सीता राम॥ ९२॥


फिर पुष्पक विमान मंगवाया। सीता सहित बैठ रघुराया॥
किष्किन्धा को लौटे राम। पतित पावन सीता राम॥ ९३॥


ऋषि पत्नी दर्शन को आई। दीन्ही उनको सुन्दर्तई॥
गंगा-तट पर आए राम। पतित पावन सीता राम॥ ९४॥


नंदीग्राम पवनसूत आए। भगत भरत को वचन सुनाये॥
लंका से आए हैं राम। पतित पावन सीता राम॥ ९५॥


कहो विप्र, तुम कहाँ से आए। ऐसे मीठे वचन सुनाये॥
मुझे मिला दो भैया राम। पतित पावन सीता राम॥९६॥


अवधपुरी रघुनन्दन आए। मन्दिर-मन्दिर मंगल छाये॥
माताओं को किया प्रणाम। पतित पावन सीता राम॥९७॥


भाई भरत को गले लगाया। सिंहासन बैठे रघुराया॥
जग ने कहा, हैं राजा राम। पतित पावन सीता राम॥९८॥


सब भूमि विप्रों को दीन्ही। विप्रों ने वापिस दे दीन्ही॥
हम तो भजन करेंगे राम। पतित पावन सीता राम॥९९॥


धोबी ने धोबन धमकाई। रामचंद्र ने यह सुन पाई॥
वन में सीता भेजी राम। पतित पावन सीता राम॥१००॥


बाल्मीकि आश्रम में आई। लव और कुश हुए दो भाई॥
धीर वीर ज्ञानी बलवान। पतित पावन सीता राम॥ १०१॥


अश्वमेघ यज्ञ कीन्हा राम। सीता बिनु सब सुने काम।।
लव-कुश वहां लियो पहचान। पतित पावन सीता राम॥ १०२॥


सीता राम बिना अकुलाईँ। भूमि से यह विनय सुनाईं॥
मुझको अब दीजो विश्राम। पतित पावन सीता राम॥ १०३॥


सीता भूमि माई समाई। सुनकर चिंता करी रघुराई॥
उदासीन बन गए हैं राम। पतित पावन सीता राम॥ १०४॥


राम-राज्य में सब सुख पावें। प्रेम-मग्न हो हरि गुन गावें॥
चोरी चाकरी का नहीं काम। पतित पावन सीता राम॥ १०५॥


ग्यारह हज़ार वर्षः पर्यन्त। राज किन्ही श्री लक्ष्मीकंता॥
फिर बैकुंठ पधारे राम। पतित पावन सीता राम॥ १०६॥


अवधपुरी बैकुंठ सीधी। नर-नारी सबने गति पाई॥
शरणागत प्रतिपालक राम। पतित पावन सीता राम॥ १०७॥


'हरि भक्त' ने लीला गाई। मेरी विनय सुनो रघुराई॥
भूलूँ नहीं तुम्हारा नाम। पतित पावन सीता राम॥ १०८॥


यह माला पुरी हुयी मनका एक सौ आठ॥
मनोकामना पूर्ण हो नित्य करे जो पाठ ॥
॥ हरि ॐ ॥

यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम् ।

यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम् ।
बाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम् ॥

Yatra yatra raghunatha kirtanam

Yatra yatra raghunatha kirtanam;
Tatra tatra kritha masthakanjalim;
Bhaspavaari paripurna lochanam;
Maarutim namata raakshasanthakam


Meaning : "We bow to Maruti, Sri Hanuman, who stands with his palms folded above his forehead, with a torrent of tears flowing down his eyes wherever the Names of Lord Rama are sung".

Raamaaya Ramabadraaya

Raamaaya Ramabadraaya
Ramachandraaya Vaydasey
Raghunaadaaya Naadaaya Seethaaya
Pathaye Namo Namah

Meaning: My salutations to Bhagawan Sri Rama, the protector of all, one who knows all, the descendant of the Raghu dynasty, the husband of Sita and the Bhagawan of the entire universe.

Anjana Nandanam Veeram Janaki Soka

Anjana Nandanam Veeram Janaki Soka Naasanam, 
Kapeesa Maksha Hantharam,
Vandhe Lanka Bhayankaram
Meaning: Salutations to the terror of Lanka, Who is heroic the son of Anjana, Who brought to an end all sorrows of Sita, Who is the king of Monkeys, and Who killed Aksha, the son of Ravana

Divya Mangala Dehaaya Peethambara

Divya Mangala Dehaaya Peethambara
Dharayacha Thaptha Kanchana Varnaaya
Mangalam Shri Hanumathey

Meaning: O! Lord Hanuman with a divine form, who wears an yellow silk garment and who looks like molten gold, let thy be auspiciousness.

Anjaneya Madhi Paatalaananam

"Anjaneya Madhi Paatalaananam; 
Kanjanaadri Kamaneeya Vigraham; 
Paarijatha Tharu Moola Vaasinam; 
Bhaavayami Bhava mana Nandanam "

Meaning: I bow before the darling son of the god of wind, Who is the son of Anjana, Who is great among killers of ogres, Who is like a golden mountain, Who is handsome looking, And who lives near the roots of Parijatha tree.

Mano javam , maruda thulya vegam

"Mano javam , maruda thulya vegam,
Jithendriyam buddhi matham varishtam, 

Vatha atmajam vanara yudha mukhyam, 
Sree rama dootham sirasa namami"

Meaning: I bow my head and salute the emissary of Rama, Who has won over his mind, Who has similar speed as wind, Who has mastery over his organs, Who is the greatest among knowledgeable, Who is the son of God of wind, And who is the chief in the army of monkeys.

Saturday, 9 July 2011

Kaun kehta hai Bhagvan aate nahi with English Meaning

Achyutam Keshavam Krishna Damodaram,
Ram naraynam Janakivallabham,
(praising the Lord Krishna, with different names of Vishnu)

Kaun kehta hai Bhagvan aate nahi
Bhakta Meera ke jaise bulate nahi,
(Who says God does not come? 

You don't call Him with the devotion of Meera)

Kaun kehta hai Bhagvan khaate nahi,
Ber Shabri ke jaise khilate nahi, ... Achyutam ...
(Who says God does not eat? 

You don't feed him like how Shabari fed him)

Kaun kehta hai Bhagvan Sote nahi,
Maa Yashoda ke jaise sulate nahin,
(Who says God does not sleep? 

You don't make him sleep like how Mother Yashoda did)

Kaun kehta hai Bhagvan naachte nahi,
Gopion ki tarah nachaate nahin, Achyutam...
(Who says God does not dance? 

You don't make him dance like how Gopis did)

अच्युतम केशवम, कृषण दामोदरम


अच्युतम केशवम, कृषण दामोदरम
रामनारायणं जानकिवल्लभम.......

कौन कहते है भगवान आते नहीं - 2
तुम मीरा जैसे बुलाते नहीं. -2

अच्युतम केशवम, कृषण दामोदरम
रामनारायणं जानकिवल्लभम.......

कौन कहते है भगवान खाते नहीं -२
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं -2

अच्युतम केशवम, कृषण दामोदरम
रामनारायणं जानकिवल्लभम.......

कौन कहते है भगवान सोते नहीं -२
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं - 2

अच्युतम केशवम, कृषण दामोदरम
रामनारायणं जानकिवल्लभम.......

कौन कहते है भगवान नाचते नहीं -२
गोपियों की तरह तुम नाचते नहीं - 2

अच्युतम केशवम, कृषण दामोदरम
रामनारायणं जानकिवल्लभम.......

जपहिं नामु जन आरत भारी I मिटहिं कुसंकट होंहि सुखारी II दीन दयाल बिरिदु संभारी I हरहूनाथ मम संकट भारी II

जपहिं नामु जन आरत भारी I 
मिटहिं कुसंकट होंहि सुखारी II
दीन दयाल बिरिदु संभारी I 
हरहूनाथ मम संकट भारी II

मनोजवं मारुततुल्यावेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठंम, वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम प्रपद्ये.

मनोजवं मारुततुल्यावेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठंम,
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम प्रपद्ये.

Friday, 8 July 2011

Are Dwarpalo Kanhaiya Se Keh Do


Dekho dekho yeh garibi, yeh garibi ka haal,
Krishna ke dwar pe biswas leke aaya hoon,
Mere bachpan ka yaar hai mera Shyam,
Yeh hi soch kar mein aas kar ke aaya hoon.

Are dwarpalo Kanhaiya se keh do-oooooo
Are dwarpalo uss Kanhaiya se keh do,
Ki dwar pe Sudama karib aa gaya hai.
Ki dwar pe Sudama karib aa gaya hai.

Haaa… bhatakte bhatakte naa jaane kaha se,
Bhatakte bhatakte naa jaane kaha se,
Tumhare mahal ke karib aa gaya hai.
Tumhare mahal ke karib aa gaya hai.

Ooo…Are dwarpalo Kanhaiya se keh do,
Ki dwar pe Sudama karib aa gaya hai.
Ki dwar pe Sudama karib aa gaya hai.

Naa sar pe hai pagri naa tan pe hai jaama,
Baata do Kanhaiya ko naam hai Sudama.
Haaa…Baata do Kanhaiya ko naam hai Sudama.
Haaa…Baata do Kanhaiya ko naam hai Sudama.

Naa sarpe hai pagri,
Naa tan pe hai jaama.
Bata do Kanhaiya ko naam hai Sudama.

Hooo….Naa sarpe hai pagri naa tan pe hai jaama,
Baata do Kanhaiya ko naam hai Sudama.
Hooo….Baata do Kanhaiya ko naam hai Sudama.

Ek baar Mohan se ja kar ke kahe do,
Tum ek baar Mohan se ja kar ke kahe do,
Ki milne sakha ka naseeb aa gaya hai.
Ki milne sakha ka naseeb aa gaya hai.

Are dwarpalo Kanhaiya se keh do,
Ki dwar pe Sudama karib aa gaya hai.
Ki dwar pe Sudama karib aa gaya hai.

Sunte hi daure chale aaye Mohan,
Lagaya gale se Sudama ko Mohan.
Haaa…Lagaya gale se Sudama ko Mohan.
Lagaya gale se Sudama ko Mohan.

Oh..Sunte hi daure,
Chale aaye Mohan.
Lagaya gale se,
Sudama ko Mohan.

Haaa…Sunte hi daure chale aaye Mohan,
Lagaya gale se Sudama ko Mohan.
Haaa…Lagaya gale se Sudama ko Mohan.

Hua Ruksmani ko bahut hi acambha,
Hua Ruksmani ko bahut hi acambha,
Yeh mehmaan kaisa ajeeb aagaya hai.
Yeh mehmaan kaisa ajeeb aagaya hai.

Hua Ruksmani ko bahut hi acambha,
Yeh mehmaan kaisa ajeeb aagaya hai.
Yeh mehmaan kaisa ajeeb aagaya hai.


Ohh barabar mein Sudama baithe
charan aasuyon se Shyam ne dhulaye
barabar mein Sudama baithe
charan aasuyon se Shyam ne dhulaye
haan... barabar mein Sudama baithe
charan aasuyon se Prabhu ne dhulaye

Haaa... Na ghabrao pyare
Zaara tum Sudama
Na ghabrao pyare
Zaara tum Sudama
Khushi ka shama yeh kareeb aa gaya hai

Na ghabrao pyare zaara tum Sudama
Khushi ka shama yeh kareeb aa gaya hai

Are dwarpalo uss Kanhaiya se keh do,Ki dwar pe Sudama karib aa gaya hai.
Ki dwar pe Sudama karib aa gaya hai.

Hey dukh bhanjan maruti nandan sun loo meri pukaar




Hey dukh bhanjan maruti nandan,
Sun loo meri pukaar
Pawan sut vinati baram baar - 2) x 2

Ast siddhi nav nidhi ke daata,
Dukhiyon ke tum bhagya vidhata - 2
Siya raam ke kaaj sanwaare - 2 ) x 2
Mera kar uddhar.
Pawan sut vinati baram baar - 2
Hey dukh bhanjan maruti nandan,
Sun looo meri pukaar.
Pawan sut vinati baram baar - 2

Aprampaar hai sakti tumhari,
Tum par rijhe awadh bihari - 2
Bhakti bhaw se dhyaaun tohe - 2
Kar dukhon se paar.
Pawan sut vinati baram baar - 2
Hey dukh bhanjan maruti nandan,
Sun looo meri pukaar
Pawan sut vinati baram baar - 2

Japun nirantar naam tihara,
Ab nahin chodun tera dwaara - 2
Raam bhakt mohe saran mein lije - 2
Bhav sagar se taar.
Pawan sut vinati baram baar - 2
(Hey dukh bhanjan maruti nandan,
Sun looo meri pukaar.
Pawan sut vinati baram baar - 2) x 2


हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार |
पवनसुत विनती बारम्बार ||
अष्ट सिद्धि नव निद्दी के दाता, दुखिओं के तुम भाग्यविदाता |
सियाराम के काज सवारे, मेरा करो उधार ||
अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी, तुम पर रीझे अवधबिहारी |
भक्ति भाव से ध्याऊं तुम्हे, कर दुखों से पार ||
जपूं निरंतर नाम तिहरा, अब नहीं छोडूं तेरा द्वारा |
राम भक्त मोहे शरण मे लीजे भाव सागर से तार ||

Suno Suno Ram Katha Yeh





Toh Bholo Siya Pati Ramchandra Maharaj Ki Jai
Pavan Sut Hanuman Ki Jai
Jai Ho
Suno Suno Ram Katha Yeh
Har Legi Sakal Vyatha Yeh
Dashrath Ke Sukh Ki Gaatha
Purshon Mein Jo Uttam Tha
Suno Suno Suno Woh Adhyaye
Jab Purshottam Shri Ram Ne
Lanka Pe Kar Ke Chadayi
Raavan Ko Dhool Chatayi
Aur Sita Bhi Wapas Aayi
Suno Suno Suno Sunaun
Kalyug Mein Satyug Darshaun
Subh Subh Subh Sandesh Sunaun
Ram Siya Ke Gun Main Gaaun

Suno Suno Ram Katha Yeh
Har Legi Sakal Vyatha Yeh
Dashrath Ke Sukh Ki Gaatha
Purshon Mein Jo Uttam Tha

Purshottam Ram Jagat Ke
Pavan Putra Ram Bhakat The
Lacchman The Dhaal Se Bhaari
Lanka Pe Hui Chadayi
Phir Ram Ji Ne Apni Ardhangani Mata Sita Ko Paaya

Purshottam Ram Jagat Ke
Pavan Putra Ram Bhakat The
Lacchman The Dhaal Se Bhaari
Lanka Pe Hui Chadayi
Toh Bolo Siya Pati Ram Chandra Maharaj Ki Jai

Lanka Pe Lankesh Hara Ke
Dekh Teer Shamseeron Se
Chale Ayodhya Ram Palat Ke
Veeron Se Randheeron Se
Adhron Pe Muskaan Dhari
Bhuja Mein Apni Maan Bhara
Jai Jai Jai Ram Hui
Aur Lanka Mein Lankesh Mara
Ram Chale Toh Sevak Bratha Saath Chale
Gaaon Gaaon Mein Ram Siya Ki Baat Chale
Jahan Jahan Se Raam Ki Sena Guzar Rahi
Umad Gumad Ke Jungle Aaye Aaj Wahin

Shor Machaye Jashn Manaye
Ram Siya Ke Darshan Paaye
Jai Jai Jai Jaikal Bulaayein
Pag Pag Pe Deep Jalayein
Arrey Suno Suno Ram Katha Yeh
Har Legi Sakal Vyatha Yeh
Dashrath Ke Sukh Ki Gaatha
Purshon Mein Jo Uttam Tha

Aur Us Ke Baad Sab Mil Kar Ayodhya Laut Aaye

Khushi Ke Palchin Uss Pal Beetay
Ek Murkh Jab Bola Aise
Ram Hain Keval Lanka Jeetay, Lanka Jeetay
Kya Paaya Hai Sita Ko Ram Ne Paawan
Kya Pawanta Ko Bhang Kar Gaya Paapi Raavan
Ram Yeh Sun Ke Reh Gaye Mann Se Reetay Reetay
Agni Pariksha De Do Bole Paawan Sitey
Agni Pariksha
Asur Dhara Ne Manwa Seencha
Sita Ne Di Agan Pariksha

Achhayi Ki Jeet Sunischit Hoti Hai
Sachaayi Hi Sabse Menhga Moti Hai
Hua Daam Ko Tha Sir Neecha
Safal Ho Gayi Agan Pariksha
Arrey Safal Ho Gayi Agan Pariksha
Gad Gad Ho Ram Yun Bole
Paawan Se Bhed Yun Khole
Satya Aur Prem Kabhi Na
Mrityu Ke Aagey Dole
Suno Suno Ram Katha Yeh
Har Legi Sakal Vyatha Yeh
Dashrath Ke Sukh Ki Gaatha
Purshon Mein Jo Uttam Tha
Toh Bolo Siya Pati Ramchandra Maharaj Ki Jai
Pawan Sut Hanuman Ki Jai, Jai Ho