Tuesday, 28 June 2011

हनुमान साठिका

हनुमान साठिका 

जय जय जय हनुमान अड़न्गी | महावीर विक्रम बजरंगी ||1 
जय कपीश जय पवन कुमारा | जय जय वंदन शील अगारा ||2 
जय आदित्य अमर अविकारी | अरि मरदन जय जय गिरधारी ||3 
अंजनी उदर जन्म तुम लीन्हो | जय जय कार देवतन कीन्हो ||4 
बाजै दुंदिभी गगन गंभीरा | सुर मन हरष असुर मन पीरा ||5 
कपि के डर गढ़ लंक समानी | छूटि बंदि देव तन जानी ||6 
ऋषी समूह निकट चलि आये | पवन तनय के पद सिर नाए |7 
बार बार स्तुति कर नाना | निर्मल नाम धरा हनुमाना ||8 
सकल ऋषिन मिलि अस मत ठाना | दीन बताये लाल फल खाना ||9 
सुनत वचन कपि मन हर्षाना | रवि रथ उदय लाल फल जाना ||10 
रथ समेत कपि कीन्ह अहारा | सूर्य बिना भयो अति अँधियारा ||11 
विनय तुम्हार करैं अकुलाना | तब कपीश की स्तुति ठाना ||12 
सकल लोक वृतांत सुनावा | चतुरानन तब रवि उगिलावा ||13 
कहा बहोरि सुनहु बलशीला | रामचन्द्र करिहैं बहु लीला || 14 
तब तुम उनकर करब सहाई | अबहि बसहु कानन में जाई ||15 
असि कहि विधि निज लोक सिधारे | मिले सखा संग पवन कुमारे ||16 
खेलें खेल महा तरु तोड़ें | ढेर करें बहु पर्वत फौड़ें ||17 
जेहि गिरि चरण देहि कपि धाई | गिरि समेत पातालाहिं जाई ||18 
कपि सुग्रीव बाली की त्रासा | निरखत रहे राम मगु आशा ||19 
मिले राम तँह पवन कुमारा | अति आनंद सप्रेम दुलारा ||20 
मणि मुंदरी रघुपति सो पाई | सिया खोज ले चलि सिर नाई ||21 
सत जोजन जल निधि विस्तारा | अगर अपार देवतन हारा |22 
जिमि सर गोखुर सरिस कपीशा | लाँघि गए कपि कहि जगदीशा ||23 
सीता चरण शीश तुम नाए | अजर अमर के आशिष पाए ||24 
रहे दनुज उपवन रखवारी | एक से एक महाभट भारी ||25 
तिन्हे मारि पुनि कहेउ कपीसा | दहेऊ लंक कोप्यो भुज बीसा ||26 
सिया बोध दै पुनि फिर आये | रामचंद्र के पाद सिर नाए ||27 
मेरु उपार आप छिन माहीं | बांध्यो सेतु निमिष एक मांही ||28 
लक्ष्मण शक्ति लागी जबहीं | राम बुलाय कहा पुनि तबहीं ||29 
भवन समेत सुषेण को लाये | तुरत संजीवन को पुनि धाये ||30 
मग मँह कालनेमि को मारा | अमिट सुभट निशचर संहारा ||31 
आनि संजीवन गिरि समेता | धरि दीन्हो जंह कृपानिकेता ||32 
फनपति केर शोक हरि लीन्हा | हरषि सुरन सुर जय जय कीन्हा ||33 
अहिरावन हरि अनुज समेता | लै गयो तहाँ पाताल निकेता ||34 
जहां रहे देवी अस्थाना | दीन चहै बलि काढि कृपाना ||35 
पवन तनय प्रभु कीन गुहारी | कटक समेत निशाचर मारी ||36 
रीछ कीशपति सबै बहोरी | राम लखन कीने एक ठौरी ||37 
सब देवतन की बंदि छूडाये| सो कीरति नारद मुनि गाये ||38 
अक्षय कुमार को मार संहारा | लूम लपेटी लंक को जारा ||39 
कुम्भकरण रावण को भाई | ताहि निपाति कीन्ह कपिराई ||40 
मेघनाद पर शक्ति मारा | पवन तनय सब सो बरियारा ||41 
तंहा रहे नारान्तक जाना | पल में हते ताहि हनुमाना ||42 
जंह लगि मान दनुज कर पावा | पवन तनय सब मारि नसावा |43| 
जय मारुत सूत जय अनुकूला | नाम कृशानु शोक सम तूला || 44 
जंह जीवन पर संकट होई | रवि तम सम सो संकट खोई ||45 
बंदी परै सुमरि हनुमाना | संकट कटे धरे जो ध्याना |46 
यम को बांधि वाम पाद लीन्हा | मारुतसुत व्याकुल सब कीन्हा ||47 
सो भुज बल को दीन्ह कृपाला | तुम्हरे होत मोर यह हाला ||48 
आरत हरण नाम हनुमाना | सादर सुरपति कीन्ह बखाना ||49 
संकट रहे न एक रती को | ध्यान धरे हनुमान जती को ||50 
धावहु देख दीनता मोरी | कहौ पवनसुत युग कर जोरी ||51 
कपिपति बेगि अनुग्रह करहूँ | आतुर आय दुसह दुःख हरहूँ ||52 
राम सपथ मैं तुमहि सुनावा | जवन गुहार लाग सिय जावा ||53 
 शक्ति तुम्हार सकल जग जाना | भव बंधन भंजन हनुमाना ||54 
यह बंधन कर केतिक बाता | नाम तुम्हार जगत सुख दाता ||55 
करौ कृपा जय जय जग स्वामी | बारि अनेक नमामि नमामी ||56 
भौमवार करि होम विधाना | धूप दीप नैवेद्य सुजाना ||57 
मंगल दायक को लौ लावे | सुर नर मुनि वांछित फल पावै ||58 
जयति जयति जय जय जग स्वामी | समरथ पुरुष सुअंतर जामी ||59 
अंजनि तनय नाम हनुमाना | सो तुलसी के प्राण समाना || 60 

 दोहा : 

जय कपीश सुग्रीव तुम, जय अंगद हनुमान | 
राम लखन सीता सहित, सदा करौ कल्याण || 
वन्दौ हनुमत नाम यह, भौमवार परमान | 
ध्यान धरे नर निश्चय, पावै पाद कल्याण || 
पढ़े जो नित यह साठिका , तुलसी कहें विचार | 
रहै न संकट ताहि को, साक्षी है त्रिपुरार ||

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