Monday, 24 May 2010

हे राम चन्द्र कह गये सिया से ऐसा कलियुग आयेगा - Hey Ramachandra Keh Gaye Siya se Aisa Kalyug Aayega



he raamachandra keh gaye siyaa se aaisa kaljuga aayega
hansa chugega daana dunka kauvva moti khaayega

siyaa ne puchhaa,
kalajuga mein dharam karamko koi nahi maanegaa?

to prabhu bole:
dharam bhi hoga, karam bhi hoga
parantu sharam nahi hogi
baata baata par maata pitaa ko
ladka aankh dikhaayega

raaja aur praja dono in mein
hogi nisadin kheenchaataani
kadam kadam par karenge
dono apni apni mann maani

jiske haath mein hogi laathi
bhainsa vahi le jaayega

suno siya kaljug mein kaala dhan aur kaale mann honge
chora uchakke nagar setha aur prabhu bhakta nirdhan honge

jo hoga lobhi aur bhogi vo jogi kehlaayega
mandir soona soona hoga bhari rahengi madhushaala
pitaake sang sang bhari sabhaamein naachegi gharki baala
kaisa kanyaadaan bidaahi kanyaaka dhan khaayega

moorakh ki preet buri jue ki jeeta buri
bure sang baitha baitha bhaage hi bhaage
kaajal ki kothari mein kaise hi jatana karo
kaajal ka daag bhaai laage hi laage

kitna jati ho koi kitna sati ho koi
kaamani ke sang kaam jaage hi jaage
suno kahe gopeeraama jiska hai raamadhaama
uska to phanda gale laage hi laage.

हे राम चन्द्र कह गये सिया से
ऐसा कलियुग आयेगा
हंस चुगेगा दाना दुनका
हंस चुगेगा दाना दुनका
कौवा मोती खायेगा
हे जी रे रे ….

सिया ने पूछा, ‘ भगवन, कलियुग में धर्म कर्म को कोई नही मानेगा।’
तो प्रभु बोले,’

धर्म भी होगा कर्म भी होगा
धर्म भी होगा कर्म भी होगा
परन्तु शर्म नही होगी

बात बात में मात पिता को
बात बात में मात पिता को
बेटा आँख दिखायेगा

हे राम चन्द्र कह गये सिया से ….

राजा और प्रजा दोनों में
होगी निसदिन खिंचा तानी, खिंचा तानी
कदम कदम पर करेंगे दोनों
अपनी अपनी मनमानी, मनमानी
जिसके हाथ में होगी लाठी
भैंस वही ले जायेगा

हंस चुगेगा दाना दुनका
हंस चुगेगा दाना दुनका
कौवा मोती खायेगा

हे राम चन्द्र कह गये सिया से ….

सुनो सिया कलियुग में
काल धन और काले मन होंगे
चोर उचक्के नगर सेठ
और प्रभु भक्त निर्धन होंगे
जो होगा लोभी और भोगी
जो होगा लोभी और भोगी
वो जोगी कहलायेगा

हंस चुगेगा दाना दुनका
हंस चुगेगा दाना दुनका
कौवा मोती खायेगा

हे राम चन्द्र कह गये सिया से ….

मंदिर सूना सूना होगा
भरी रहेंगी मधुशाला,मधुशाला
पिता के संग संग भरी सभा में
नाचेंगी घर की बाला, घर की बाला
कैसा कन्यादान पिता ही
कैसा कन्यादान पिता ही
कन्या का धन खायेगा

हंस चुगेगा दाना दुनका
हंस चुगेगा दाना दुनका
कौवा मोती खायेगा

हे जी रे हे जी रे ….

मूरख की प्रीत बुरी जुए की जीत बुरी
बुरे संग बैठ चैन भागे ही भागे
भागे ही भागे
काजल की कोठरी में कैसो भी जतन करो
काजल का दाग भाई लागे ही लागे भाई
काजल का दाग भाई लागे ही लागे

हे जी रे हे जी रे …..

कितना जती हो कोई कितना सती हो कोई
कामिनी के संग काम जागे ही जागे
जागे ही जागे
सुनो कहे गोपीराम जिसका है रामधाम
उसका तो फंद गले लागे ही लागे रे भाई
उसका तो फंद गले लागे ही लागे

हे जी रे हे जी रे ….

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